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स्मॉल इन्टेस्टिन (छोटी आंत का) कैंसर भारत में दुर्लभ कैंसर में से एक है। इस स्थिति के प्रमुख जोखिम कारकों में आहार की खराब आदतें, पॉलीप्स की उपस्थिति, आंतों के विकारों का इतिहास आदि शामिल हैं।
जब छोटी आंत की परत में मौजूद सेल्स (कोशिकाएं) असामान्य रूप से विभाजित होने लगती हैं,तब स्मॉल इन्टेस्टिन (छोटी आंत का) कैंसर, या बस, इन्टेस्टिनल (आंतों का) कैंसर होता है।
छोटी आंत को तीन भागों में विभाजित किया जाता है, जो डुओडेनम (ग्रहणी) (वह भाग जो पेट को छोटी आंत से जोड़ता है), जेजुनम (छोटी आंत का मध्य भाग) और इलियम (वह भाग जो छोटी आंत को बृहदान्त्र से जोड़ता है)। इस प्रकार का कैंसर आमतौर पर डुओडेनम से उत्पन्न होता है।
यह भारत में कैंसर के दुर्लभ प्रकारों में से एक है। इस स्थिति के प्रमुख जोखिम कारकों में आहार की खराब आदतें, पॉलीप्स की उपस्थिति, आंतों के विकारों का इतिहास आदि शामिल हैं।
जिनसे वे उत्पन्न होते हैं, उन सेल्स (कोशिकाओं) के प्रकार के आधार पर, स्मॉल इन्टेस्टिन (छोटी आंत के) कैंसर को निम्न प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता
यह स्मॉल इन्टेस्टिन (छोटी आंत के) कैंसर का सामान्य प्रकार है, और यह स्रावी सेल्स (कोशिकाओं) में शुरू होता है जो पाचन रस और बलगम को स्त्रवित करने के लिए जिम्मेदार होती हैं। प्रारंभ में, वे नॉन - कैंसरस पॉलीप्स के रूप में दिखाई देते हैं, जो बाद में ट्यूमर में बदल सकते हैं।
इस प्रकार का कैंसर छोटी आंत में मौजूद कोमल ऊतकों में बनता है।
यह धीमी गति से बढ़ने वाला कैंसर का प्रकार है जो छोटी आंत के निचले हिस्से में बनता है। प्रारंभिक अवस्था में इसका कोई लक्षण नहीं हो सकता है, और इसे लिवर (यकृत), अपेंडिक्स (परिशिष्ट), रेक्टम (मलाशय) आदि जैसे अंगों में फैलते हुए देखा जा सकता है।
यह कैंसर का प्रकार जीआई ट्रैक्ट की परत में शुरू होता है। गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर या तो सौम्य या घातक हो सकते हैं।
इसे आंतों का लिंफोमा भी कहा जाता है, यह कैंसर का प्रकार लिम्फ नोड्स में बनता है। जिन लोगों की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती है उन लोगों में कैंसर का यह प्रकार अधिक आम है।
आमतौर पर स्मॉल इन्टेस्टिन (छोटी आंत के) कैंसर के लक्षण अक्सर अन्य प्रकार की कम गंभीर स्वास्थ्य स्थितियों के समान ही होते हैं। इस वजह से स्मॉल इन्टेस्टिन (छोटी आंत के) कैंसर के निदान में देरी हो सकती है, जिससे स्मॉल इन्टेस्टिन (छोटी आंत के) कैंसर विकसित होने के महीनों बाद जब लक्षण दिखाना शुरू हो जाते है तब उसका निदान होता है।
दर्द और बेचैनी स्मॉल इन्टेस्टिन (छोटी आंत के) कैंसर से जुड़े प्राथमिक लक्षण हैं। स्मॉल इन्टेस्टिन (छोटी आंत के) कैंसर से जुड़े अन्य प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं :
स्मॉल इन्टेस्टिन (छोटी आंत के) कैंसर का सटीक कारण ज्ञात नहीं है। हालांकि, कुछ कारकों की पहचान की गई है जो स्मॉल इन्टेस्टिन (छोटी आंत के) कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकते हैं, उन्हें नीचे सूचीबद्ध किया गया है :
पोलिप्स स्मॉल इन्टेस्टिन (छोटी आंत), लार्ज इन्टेस्टिन (बड़ी आंत) और रेक्टम (मलाशय) में मौजूद उभरे हुए पिंड होते हैं। ये पॉलीप्स आमतौर पर सौम्य होते है और हानिकारक भी नहीं होते हैं। हालांकि, कुछ मामलों में, वे एक ट्यूमर में विकसित होते हैं। इसलिए, जिन लोगों को पॉलीप्स होते है उनको अतिरिक्त देखभाल करनी चाहिए और उन्हें जल्द से जल्द इसका इलाज करवाना चाहिए।
जिन लोगों को दीर्घकालिक आंतों के विकार होते है उन लोगों में स्मॉल इन्टेस्टिन (छोटी आंत के) कैंसर का खतरा अधिक होता है। क्रोहन रोग और सीलिएक रोग जैसी स्थितियों से स्मॉल इन्टेस्टिन (छोटी आंत के) कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।
तम्बाकू और शराब का सेवन भी स्मॉल इन्टेस्टिन (छोटी आंत के) कैंसर और कई अन्य कैंसर के लिए एक बड़ा जोखिम कारक है।
मोटे लोगों में स्मॉल इन्टेस्टिन (छोटी आंत के) कैंसर का जोखिम अधिक होता है।
जिन लोगों का कोलोरेक्टल कैंसर का इतिहास होता है उन लोगों में स्मॉल इन्टेस्टिन (छोटी आंत का) कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है।
जिन लोगों का कोलोरेक्टल कैंसर का सकारात्मक पारिवारिक इतिहास होता है उन लोगों में स्मॉल इन्टेस्टिन (छोटी आंत के) कैंसर का जोखिम अधिक होता है।
विरासत में मिले कुछ आनुवंशिक विकार, जैसे कि फैमिलियल एडिनोमेटस पॉलीपोसिस (एफएपी), प्यूट्ज़-जेगर्स सिंड्रोम, लिंच सिंड्रोम, सिस्टिक फाइब्रोसिस और एमयूटीवाईएच - संबंधित पॉलीपोसिस, स्मॉल इन्टेस्टिन (छोटी आंत के) कैंसर के बढ़ते जोखिम से जुडे हुए है।
स्मोक्ड और जले हुए भोजन और पशु वसा से भरपूर खाद्य पदार्थों के अधिक सेवन से भी स्मॉल इन्टेस्टिन (छोटी आंत के) कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। एक निष्क्रिय जीवनशैली भी इस बीमारी के निदान के जोखिम को बढ़ाती है।
बढ़ती उम्र इस बीमारी के लिए एक और जोखिम कारक है।
स्मॉल इन्टेस्टिन (छोटी आंत का) कैंसर महिलाओं की तुलना में पुरुषों में अधिक पाया जाता है।
कई मामलों में, लक्षणों के अस्पष्ट होने और विशिष्ट ना होने के कारण स्मॉल इन्टेस्टिन (छोटी आंत के) कैंसर के निदान में देरी होती है। निदान में देरी के कारण जटिलताएं बढ जाती है और फिर एक व्यापक उपचार योजना की आवश्यकता होती है। निदान देर से होने के कारण नैदानिक परिणामों और उत्तरजीविता दर पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसलिए, लक्षणों को नजरअंदाज करने से बचना चाहिए और सटीक निदान के लिए डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए।
स्मॉल इन्टेस्टिन (छोटी आंत के) कैंसर का पता लगाने और निदान करने के लिए नियोजित प्रमुख प्रक्रियाएं निम्नलिखित हैं :
शुरुआत में, डॉक्टर स्मॉल इन्टेस्टिन (छोटी आंत के) कैंसर के लक्षणों जैसे कि गांठ या किसी अन्य असामान्यताओं की उपस्थिति की जांच करने के लिए मरीज़ का शारीरिक परीक्षण करते है। डॉक्टर मरीज़ द्वारा अनुभव किए गए लक्षणों, महत्वपूर्ण चिकित्सा स्थितियों, पहले प्राप्त किए गए उपचारों, एलर्जी आदि पर भी ध्यान दे सकते हैं।
स्मॉल इन्टेस्टिन (छोटी आंत के) कैंसर के मरीज़ों में, समय के साथ ट्यूमर से खून बहना शुरू हो जाता है और इससे एनीमिया (खून की कमी) हो जाता है। विभिन्न प्रकार की सभी रक्त सेल्स (कोशिकाएं) इष्टतम मात्रा में मौजूद हैं या नहीं, इसकी जांच करने के लिए एक साधारण रक्त परीक्षण की सिफारिश की जा सकती है। लिवर (यकृत) और किडनी (गुर्दे) के कार्यों का आकलन करने के लिए भी रक्त परीक्षण की सिफारिश की जा सकती है। क्या कैंसर शरीर के अन्य अंगों में फैल गया है या नहीं इसकी जांच करने में भी यह परीक्षण सहायक होते है।
यह परीक्षण मल में छोटी मात्रा में मौजूद रक्त का पता लगाने में मदद करता है जिसे खुली आंखों से नहीं देखा जा सकता है। मल में रक्त की उपस्थिति पॉलीप्स, आंतों की सूजन, स्मॉल इन्टेस्टिन (छोटी आंत के) कैंसर या कोलोरेक्टल कैंसर का संकेत होता है। अगर फीकल ऑकल्ट ब्लड टेस्ट के परीणाम सकारात्मक आते है तो उस मामले में, एक निश्चित निदान पर पहुंचने के लिए अतिरिक्त परीक्षणों की सिफारिश की जा सकती है।
एंडोस्कोपी एक नैदानिक प्रक्रिया है जिसे अधिकांश गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर के निदान के लिए अनुशंसित किया जाता है। एक पतली ट्यूब जिस पर प्रकाश स्रोत और वीडियो कैमरा फिट किया गया होता है उसको जीआई ट्रैक्ट में डाला जाता है, और यह तकनीशियनों को पॉलीप्स और अन्य असामान्यताओं की उपस्थिति के लिए आंत्र के क्षेत्रों की अच्छी तरह से जांच करने की अनुमति देता है। स्मॉल इन्टेस्टिन (छोटी आंत के) कैंसर के निदान के लिए एंडोस्कोपी के विभिन्न प्रकार उपलब्ध हैं :
अप्पर एंडोस्कोपी एक चिकित्सा प्रक्रिया है, जिसमें एक लंबी, लचीली ट्यूब जिस पर एक छोटा सा कैमरा फिट किया गया होता है उसका उपयोग ऊपरी पाचन तंत्र, जिसमें अन्नप्रणाली, पेट और डुओडेनम (छोटी आंत का ऊपरी भाग) शामिल होता है उसकी अच्छे से जांच करने के लिए किया जाता है । यदि डॉक्टर को कुछ भी असामान्य लगता है, तो एक विशेष उपकरण का उपयोग करके संदिग्ध क्षेत्र से थोड़ी मात्रा में ऊतक का नमूना इकठ्ठा किया जाता है। बाद में कैंसर सेल्स (कोशिकाओं) की उपस्थिति के लिए इस ऊतक के नमूने की माइक्रोस्कोप के तहत जांच की जाती है।
कैप्सूल एंडोस्कोपी में पारंपरिक एंडोस्कोपी की तरह एक लंबी ट्यूब शामिल नहीं होती है। इसके बजाय, यह मरीज़ के पाचन तंत्र की छवियों को पकड़ने के लिए एक छोटे, वायरलेस कैमरे का उपयोग करता है। कैमरे को कैप्सूल के रूप में छोटी आंत में भेजा जाता है। जैसे ही यह छोटी आंत से होकर गुजरता है, यह कई छवियों को कैप्चर करता है, जो एक रिकॉर्डर में प्रेषित होती है जिसे मरीज़ की कमर पर लपेटे हुए बेल्ट पर रखा जाता है। कैप्सूल एंडोस्कोपी 8 घंटे से अधिक समय तक चलता है, और कैमरा कैप्सूल मल त्याग के माध्यम से स्वाभाविक रूप से बाहर निकल जाता है। इस कैमरे को बाद में लिया जाता है और प्राप्त छवियों को एक वीडियो बनाने के लिए एक कंप्यूटर पर ट्रान्सफर किया जाता है, जिसे बाद में डॉक्टर द्वारा पूरी तरह से जांचा जाता है। कैप्सूल एंडोस्कोपी छोटी आंत की कई विसंगतियों का पता लगा सकता है, जैसे कि विभिन्न प्रकार के आंतों के सूजन विकार, पॉलीप्स की उपस्थिति, कैंसर का गठन आदि। यह स्मॉल इन्टेस्टिन (छोटी आंत के) कैंसर के निदान के लिए एक सुरक्षित और विश्वसनीय प्रक्रिया है। यह चिकित्सा प्रक्रिया छोटी आंत की जांच करने में विशेष रूप से सहायक होती है क्योंकि यह अंग बहुत लंबा होता है और इसकी संरचना जटिल और घुमावदार होती है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि कैप्सूल एंडोस्कोपी के दौरान ऊतक के नमूने इकठ्ठा करना संभव नहीं है।
यह स्मॉल इन्टेस्टिन (छोटी आंत के) कैंसर के लिए सिफारिश कि जाने वाली एक अनोखी एंडोस्कोपी प्रक्रिया है। एक लंबी ट्यूब का उपयोग करने वाली नियमित एंडोस्कोपी के विपरीत, यह विधि दो ट्यूबों का उपयोग करती है जो एक दूसरे के अंदर रखी जाती हैं। दो ट्यूबों में से एक अंदर की ओर एंडोस्कोप है जो छोटी आंत के अंदर की छवियों को कैप्चर करने के लिए एक प्रकाश स्रोत और वीडियो कैमरा से सुसज्जित होती है। इन ट्यूबों के अंत में एक गुब्बारा भी लगाया जाता है, जो इन्फ्लेशन और डिफ्लेशन के माध्यम से पूरे स्कैन के दौरान एंडोस्कोप को जगह पर रखने में मदद करता है। यह एंडोस्कोप सेटअप मुंह या रेक्टम (मलाशय) के माध्यम से छोटी आंत में भेजा जा सकता है। यदि स्कैन के दौरान डॉक्टर को कुछ असामान्यताओं का पता चलता है, तो वह संदिग्ध क्षेत्र से आगे के विश्लेषण के लिए ऊतकी की थोड़ी मात्रा इकठ्ठा करते है।
कई बार डॉक्टर स्मॉल इन्टेस्टिन (छोटी आंत के) कैंसर के निदान के लिए बेरियम एक्स-रे की सलाह दे सकते हैं। इस प्रक्रिया के दौरान, मरीज़ को थोड़ी मात्रा में तरल बेरियम पिलाया जाता है, जो निगलने पर, अन्ननलिका, पेट और छोटी आंत की परत को कोट कर देता है। बाद में, एक्स-रे स्कैन किया जाता है। एक्स-रे बेरियम द्वारा अवशोषित होते हैं, और बेरियम से कोट हुए क्षेत्र एक्स-रे फिल्म पर सफेद दिखाई देते हैं। यह डॉक्टर को छोटी आंत की परत का अच्छी तरह से अध्ययन करने में मदद करता है और क्या सूजन, पॉलीप्स या ट्यूमर जैसी कोई असामान्यताएं हैं इसका पता लगाने में भी मदद करता है ।
ट्यूमर के आकार, प्रकार और सटीक स्थान पर विस्तृत जानकारी प्राप्त करने के लिए एमआरआई स्कैन, पेट सीटी स्कैन आदि जैसे विभिन्न इमेजिंग परीक्षणों की सिफारिश की जा सकती है। इसके अतिरिक्त, इन इमेजिंग परीक्षणों के परिणाम डॉक्टरों को बीमारी के स्टेजिंग, उपचार योजना, चिकित्सा निगरानी और रीस्टेजिंग में भी मदद करते हैं।
स्मॉल इन्टेस्टिन (छोटी आंत के) कैंसर के निश्चित निदान के लिए बायोप्सी की सिफारिश की जाती है। इस प्रक्रिया के दौरान, संदिग्ध क्षेत्र से ऊतक की एक छोटी मात्रा इकठ्ठा की जाती है, और बाद में असामान्य सेल्स (कोशिकाओं) की उपस्थिति के लिए माइक्रोस्कोप के तहत इस नमूने की जांच की जाती है। बायोप्सी नमूना या तो एंडोस्कोपी या सर्जरी के दौरान इकठ्ठा किया जा सकता है।
स्मॉल इन्टेस्टिन (छोटी आंत के) कैंसर के लिए उपचार के कई तरीके उपलब्ध हैं। उपचार योजना तैयार करते समय, डॉक्टर कई मापदंडों पर विचार करते है, जैसे रोग का चरण, ट्यूमर का सटीक स्थान, इसका आकार, मरीज़ की उम्र, मरीज़ की कुल स्वास्थ्य स्थिति और उसकी प्राथमिकताएं।
स्मॉल इन्टेस्टिन (छोटी आंत के) कैंसर के लिए मुख्य रूप से अनुशंसित उपचार विकल्पों में सर्जरी, रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा) और कीमोथेरेपी शामिल हैं। जो स्मॉल इन्टेस्टिन (छोटी आंत के) कैंसर परंपरागत उपचारों को प्रतिक्रिया नहीं देते हैं, उनका इम्यूनोथेरेपी और टार्गेटेड थेरेपी (लक्षित चिकित्सा) के साथ इलाज किया जा सकता है।
स्मॉल इन्टेस्टिन (छोटी आंत के) कैंसर के इलाज का मुख्य तरीका सर्जरी है। कैंसर के चरण और अन्य कारकों के आधार पर, डॉक्टर सर्जिकल प्रक्रियाओं में से एक की सिफारिश कर सकते हैं :
शुरुआती चरण की स्मॉल इन्टेस्टिन (छोटी आंत के) कैंसर के लिए, जो स्थानीयकृत होते हैं और एक पॉलीप के भीतर समाहित होते हैं, डॉक्टर उस पॉलीप को हटाने की सिफारिश कर सकते हैं। पॉलीपेक्टॉमी एक सरल प्रक्रिया है जिसे एंडोस्कोपी के दौरान भी किया जा सकता है।
स्मॉल बोवेल रीसेक्शन (छोटी आंत का उच्छेदन) एक सर्जिकल प्रक्रिया है, जिसमें सर्जन कैंसर से प्रभावित छोटी आंत के हिस्से को निकाल देता है। कैंसर सेल्स (कोशिकाओं) की उपस्थिति की जांच करने के लिए कैंसर प्रभावित क्षेत्र के करीब के कुछ लिम्फ नोड्स को भी निकाला जा सकता है। एक बार जब कैंसर को निकाल दिया जाता है, तो छोटी आंत के स्वस्थ हिस्से को फिर से जोडा जाता हैं। स्मॉल इन्टेस्टिन (छोटी आंत) का रीकन्स्ट्रक्शन (पुनर्निर्माण) एक प्रमुख सर्जिकल प्रक्रिया है, और मरीज़ों के लिए डॉक्टर द्वारा दिए गए सभी निर्देशों का सख्ती से पालन करना महत्वपूर्ण है।
स्मॉल इन्टेस्टिन (छोटी आंत के) कैंसर का इलाज ओपन और मिनिमली इनवेसिव (कम से कम चिरफाड वाली) सर्जरी दोनों तरीकों से किया जाता है। मिनिमली इनवेसिव (कम से कम चिरफाड वाले) सर्जिकल दृष्टिकोण में लेप्रोस्कोपिक सर्जरी और रोबोटिक सर्जरी शामिल हैं। लैप्रोस्कोपिक सर्जरी छोटे चीरों का उपयोग करती है जिसके माध्यम से ट्यूमर को निकालने के लिए सर्जिकल उपकरण, एक प्रकाश स्रोत और एक वीडियो कैमरा अंदर डाला जाता है। रोबोट-असिस्टेड सर्जरी एक अन्य मिनिमली इनवेसिव (कम से कम चिरफाड वाला) दृष्टिकोण है, जिसमें रोबोटिक सर्जरी सिस्टम की आर्म्स सर्जन के हाथ की गतिविधियों की नकल करते हैं, केवल बढ़ी हुई सटीकता के साथ। छोटे चीरों के जरिए भी रोबोटिक सर्जरी की जाती है। मिनिमली इनवेसिव (कम से कम चिरफाड वाली) सर्जरी के कई फायदे होते हैं, जैसे अस्पताल में कम समय रहना, कम रक्त स्त्राव और कम दर्द, कम निशान और तेजी से रिकवरी। बड़े ट्यूमर या ऐसे ट्यूमर जो पैंक्रिआज़ (अग्न्याशय) और लिवर (यकृत) जैसे महत्वपूर्ण अंगों के करीब हैं उनके इलाज के लिए, ओपन सर्जरी काफी हद तक पसंद की जाती है। मरीज़ों और उनकी देखभाल करने वाले लोगों को उपचार योजना को बेहतर ढंग से समझने के लिए, अपने डॉक्टरों से बात करनी चाहिए।
कीमोथेरेपी अक्सर स्मॉल इन्टेस्टिन (छोटी आंत के) कैंसर के लिए बनाई गई उपचार योजनाओं का एक हिस्सा होती है। इस उपचार दृष्टिकोण में कैंसर सेल्स (कोशिकाओं) को नष्ट करने, उनकी वृद्धि को धीमा करने और रोग के कारण होने वाले लक्षणों से छुटकारा पाने के लिए शरीर में मजबूत एंटीकैंसर दवाओं का प्रशासन करना शामिल होता है।ट्यूमर को सिकोड़ने के लिए सर्जरी से पहले कीमोथेरेपी दी जा सकती है (नियोएडजुवेंट कीमोथेरेपी); बची हुई कैंसर सेल्स (कोशिकाओं) को नष्ट करने के लिए और कैंसर के रिलैप्स (पुनरावर्तन) के जोखिम को कम करने के लिए इसे सर्जरी के बाद (एडजुवेंट कीमोथेरेपी) भी प्रशासित किया जा सकता है। जिन मामलों में मरीज़ को उन्नत चरण का स्मॉल इन्टेस्टिन (छोटी आंत का) कैंसर हो जाता है, जिसका इलाज करना मुश्किल होता है, और मरीज़ को रोग के कारण होने वाले दर्द और बेचैनी जैसे लक्षणों के प्रबंधन में सहायता की आवश्यकता होती है उन मामलों में उपशामक चिकित्सा के एक भाग के रूप में भी कीमोथेरेपी दी जाती है।
स्मॉल इन्टेस्टिन (छोटी आंत के) कैंसर प्रबंधन के लिए रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा) की भी सिफारिश की जाती है। इसमें कैंसर सेल्स (कोशिकाओं) को मारने के लिए शक्तिशाली रेडिएशन बीम (विकिरण किरणों) का उपयोग शामिल है। रोग के कारण होने वाले लक्षणों को कम करने के लिए भी रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा) का उपयोग किया जा सकता है। कुछ मामलों में, प्रशासित उपचार की प्रभावकारिता को बढ़ाने के लिए रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा) को कीमोथेरेपी के साथ संयोजित किया जाता है।
जो स्मॉल इन्टेस्टिन (छोटी आंत के) कैंसर उपचार के पारंपरिक तरीकों को प्रतिक्रिया नहीं देते हैं, उन मामलों में, कैंसर के इलाज के लिए इम्यूनोथेरेपी की सिफारिश की जा सकती है। इम्यूनोथेरेपी में कैंसर सेल्स (कोशिकाओं) के खिलाफ हमला शुरू करने के लिए मरीज़ की अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को उत्तेजित करना शामिल है। इम्यूनोथेरेपी कैंसर के खिलाफ शरीर की प्राकृतिक सुरक्षा को मजबूत करके , निर्देशित करके या बहाल करके काम करती है।
टार्गेटेड थेरेपी (लक्षित चिकित्सा) एक और अनोखा उपचार दृष्टिकोण है। स्मॉल इन्टेस्टिन (छोटी आंत के) कैंसर जहां मरीज़ मुख्य उपचारों के लिए कोई प्रतिक्रिया नहीं दिखा रहा है उन मामलों में टार्गेटेड थेरेपी (लक्षित चिकित्सा) उपचार दृष्टिकोण की सिफारिश कि जाती है । इसे सटीक चिकित्सा के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि यह कैंसर सेल्स (कोशिकाओं) पर ही हमला करती है। टार्गेटेड थेरेपी (लक्षित चिकित्सा) कैंसर सेल्स (कोशिकाओं) पर मौजूद विशेष कमजोरियों की पहचान करके और कई जटिल तंत्रों के माध्यम से उनके विकास को अवरुद्ध करके काम करती है।
हां, स्मॉल इन्टेस्टिन (छोटी आंत का) कैंसर इलाज योग्य है। स्मॉल इन्टेस्टिन (छोटी आंत के) कैंसर का प्रबंधन हाल ही में अधिक सहज हुआ है क्योंकि आज हमारे पास उपचार के कई विकल्प उपलब्ध हैं।
अध्ययनों में पाया गया है कि प्रारंभिक पहचान नैदानिक परिणामों और उत्तरजीविता दरों की गुणवत्ता पर सकारात्मक प्रभाव डालती है। यदि प्रारंभिक चरण में स्मॉल इन्टेस्टिन (छोटी आंत के) कैंसर का पता लगाया जाता है, तो कुछ मामलों में इसका सफलतापूर्वक इलाज करने के लिए केवल सर्जरी ही पर्याप्त होती है।
प्रारंभिक अवस्था में स्मॉल इन्टेस्टिन (छोटी आंत के) कैंसर को पकड़ने के लिए, लक्षणों को ध्यान में रखना चाहिए। पेट के क्षेत्र से जुड़े किसी भी दर्द, सूजन या बेचैनी को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए और तुरंत डॉक्टर के ध्यान में लाया जाना चाहिए।
हां, कुछ मामलों में स्मॉल इन्टेस्टिन (छोटी आंत का) कैंसर दोबारा हो सकता है। हालांकि, अगर जल्दी उनका निदान हो जाता है, तो सकारात्मक परिणामों के साथ उनका इलाज किया जा सकता है। रिलैप्स (पुनरावर्तन) को रोकने या उनाका जल्दी निदान करने के लिए, मरीज़ों को उनकी फालो - अप अपॉइंटमेंट (अनुवर्ती नियुक्तियों) को जारी रखना महत्वपूर्ण है जो उपचार के बाद निर्धारित की जाएंगी।